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OTP चुराने वालों का Game Over, आ गई नई 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक, फ्रॉड पर लगेगी रोक

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Apr 04, 2026 01:28 pm IST,  Updated : Apr 04, 2026 01:28 pm IST

OTP और पासवर्ड की चोरी करके बैंक अकाउंट से पैसे उड़ाने वाले साइबर क्रिमिनल्स अब हाथ मलते रह जाएंगे। बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर नए साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक पर काम कर रही है।

Silent Authentication- India TV Hindi
नई साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक Image Source : UNSPLASH

तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम और ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए एजेंसियां नए तकनीक पर काम कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर नए 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक पर काम करही है। यह मौजूदा OTP यानी वन-टाइम पासवर्ड का विकल्प बन सकती है। इस तकनीक के आने के बाद साइबर क्रिमिनल्स OTP की चोरी करके भी लोगों के बैंक अकाउंट में सेंध नहीं लगा पाएंगे। बैंक उस ट्रांजैक्शन को ब्लॉक कर देंगे। यह तकनीक फिलहाल टेस्टिंग फेज में है।

क्या है Silent Authentication?

इसे बैंकिंग सेक्टर के लिए एक्स्ट्रा लेयर ऑफ ऑथेंटिकेशन कहा जा रहा है। फिलहाल कोई भी पेमेंट करने के लिए यूजर्स को पासवर्ड के साथ-साथ OTP वेरिफाई करना होता है। इसके बाद ही ऑनलाइन ट्रांजैक्शन प्रोसेस हो पाता है। ऐसे में अगर आपके कार्ड की डिटेल और मोबाइल नंबर के सिम का एक्सेस किसी के पास हो जाएगा तो वो आपके बैंक अकाउंट में सेंध लगा सकते हैं।

साइबर क्रिमिनल्स सिम स्वैप, कॉल फॉरवर्डिंग समेत नए हथकंडों के जरिए लोगों के अकाउंट में सेंध लगा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में इस तरह के फ्रॉड के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। इनमें लोगों के बैंक अकाउंट से करोड़ों रुपये की चोरी की गई है। बैंक और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर इसका समाधान निकालने में लगी है।

कैसे करेगा काम?

ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक एक तरह का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन होगा, जिसमें फ्रंट एंड पर हैकर्स को यह पता नहीं चलेगा कि उनके द्वारा किए जाने वाले ट्रांजैक्शन को बैंक रोक सकता है। इसमें जेनुइन यूजर्स की पहचान करने के लिए बैंक अकाउंट, OTP समेत मोबाइल डिवाइस की आईडी का इस्तेमाल किया जाएगा। जिस समय बैंक अकाउंट से कोई भी ट्रांजैक्शन किया जाएगा, उसी समय रियल टाइम में बैंक यह वेरिफाई कर पाएंगे कि रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर वाला डिवाइस एक्टिव स्टेटस में है या नहीं। अगर, डिवाइस एक्टिव स्टेटस में नहीं होगा तो बैंक रियल टाइम में ट्रांजैक्शन को ब्लॉक कर देगा। इस तरह से फ्रॉड को रोकने में मदद मिलेगी।

रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव स्टेटस में है या नहीं इसकी जानकारी टेलीकॉम ऑपरेटर के जरिए मिल जाएगी। इस तरह से बैंक को पता चल जाएगा कि जो ट्रांजैक्शन किया जा रहा है वो जेनुइन यूज कर रहा है या कोई अन्य डिवाइस के माध्यम से इसे अंजाम दे रहा है। इसके अलावा दूरसंचार विभाग की तरफ से पिछले कुछ समय से काम किया जा रहा है।

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